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“पहचान”

मैं कौन हूँ?
यही प्रश्न हर बार क्यु पुछा जाता है,
जिसका उत्तर कभी नहीं मिला,
इस समाज के आइने मे कभी मेरी परछाई नज़र नही आयी।
मैं हर बार बस अंतहीन प्रकाश की ओर ही रहा,
हमेशा से फूलों की पंखुड़ियों की तरह उड़ने की ख्वाहिश रही है
क्या ये समाज मेरी इस पहचान को कभी स्वीकार कर पाएगा?
आदतन लोगों ने मुझे बार गलत ठहराया,
*क्या कली कली से, और भौंरे भौंरों से प्यार नही कर सकते* ?
मैं वही हूँ जिसने इस भिन्नता को स्वीकार किया,
इस अंधेरे के बीच में खुद को जानने की कोशिश है,
भले ही मैं इसे छिपाने की कोशिश करु या इसे छुपाऊं
मगर फिर भी इसे मिटा नहीं पाऊंगा।

🖊️ Kiran Kaithvar

शिव

शिव में ‘शि’ शब्द का अर्थ है “शक्ति”और ‘व’ का अर्थ है “कुशलता ”।
ब्रह्माण्ड के सारे प्राणी जिनके मन में मौजूद हैं,
जो अपनी करुणा दृष्टि से आपदा को नियंत्रित करते हैं,
जो पर्वतराज हिमालय और मैना की पुत्री पार्वती के आराध्य हैं,
जो तीनो लोको के स्वामी है,
जिनके सिर से अलौकिक गंगा की लहरे बहती है,
जिनके माथे पर अग्नि सा तेज है,
जो अपने सिर पर अर्ध-चंद्र का आभूषण पहने हैं,
जो पूरे संसार का भार उठाते हैं,
जो सारे जीव के रक्षक हैं,
यही सर्वत्र व्याप्त है,
यही अजर और अविनाशी है।
मेरा मन शिव में अपनी खुशी खोजता है।
भक्ति के लिए कोई दूसरा मार्ग या उपाय नहीं है,
बस शिव का विचार ही भ्रम को दूर कर देता है।

🖊️Kiran Kaithvar