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*/ ?> आवाझ - ए - अद्वैत Archives - Shabdoni Sangathe

आज भी वही हु

दिल्लगी  में  तो कभी  आवारगी में बाते करते थे,
हा, हम आज भी  वैसे  है जैसे तब हुआ करते थे।

इन आंखो से  मयकशी  छुपाने  में  हम माहिर थे,
हा, हम आज  भी  वैसे  है जैसे तब हुआ करते थे।

नरम  लहजे  में  बात  करने से हम जाने जाते थे,
हा, हम आज भी  वैसे  है जैसे तब हुआ करते थे।

तुम कहते थे किसी वक्त हम अच्छे हुआ करते थे,
हा, हम  आज  भी वैसे है जैसे तब हुआ करते थे।

आज साथ हो कभी दुआओं में सिर्फ तुम रहते थे,
हा, हम  आज  भी वैसे है जैसे तब हुआ करते थे।

अद्वैत

चंद शायरिया

वो बेमतलब उन बंधे हुए मन्नतों के धागों को गिने जा रहा था,
अफसोस साकी वो खुद के लिए तो सिर्फ सोचता रह जाता था ।

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कभी हममें तुममे भी चाह थी कभी हमे तुमसे दिलकशी भी थी,
तुमसे कभी फासला ना बढ़े ये एक साज़िश थी ये हमारी जीने की एक रस्म थी जो चले जा रही थी ।

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वो सबसे जीने की एक वजह मांगे जा रहा था,
इकबाल वो जनाजे में लेट कर अपनी मंजिल तक जा रहा था ।

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कभी उसकी बातों से दिल्लगी थी?नही तो,
कभी उसके जिस्म को देखने की चाहत थी? नही तो,

हाथ फैलाकर सर जुकाकर बहती हुई आंखो से इबादतें करते थे सच्ची आशिकी के मरीज़ हो? हा वही तो ।

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कैसे कर लूं में यकीन मंज़िल पे आके अब वो मेरे साथ नहीं,
खुदा जाने क्यू मगर कल ही तू ख्वाबों में मुझे दिखी थी वहीं।

🖊️Piyush Maru अद्वैत 🥀

हां वो है

दिल के हर कोने मे वो है, जज़्बातों के ज़िक्र में वो है
कभी यहां तो कभी वहां हर जगह मुझे दिखता वो है,

गुलाबोंके इन हसीन बागिचोमें भी महकता रोज़ वो है
कभी यहां तो कभी वहां हर जगह मुझे दिखता वो है,

अली की अझान में दिलकश इस जहान में भी वो है
कभी यहां तो कभी वहां हर जगह मुझे दिखता वो है,

शहर के गलियारों में हर किसीके आशियानों में वो है
कभी यहां तो कभी वहां हर जगह मुझे दिखता वो है,

अब्र से गिरी इन बूंदों में भी ज़िक्र आज उसका होता है
हां ये सच्चा इश्क है जो आजकल कही मिल नही पाता है ।

🖊️Piyush Maru अद्वैत✨