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*/ ?> गझल Archives - Shabdoni Sangathe

असर

दवाएं काम ना आयी दुवाओं का असर है ये,
नगर को छोड आये नई जगाओं का असर है ये।

वो झंझावत चमका गई तभी मालूम हुआ कि,
पडी थी धूल उड गई सब हवाओं का असर है ये।

सलामत घोंसला छोडा गगन से भेंट हो गई है,
अचानक छोड दी थी वो प्रथाओं का असर है ये।

जली थी आग भस्मीभूत हुआ दुर्भाव भीतर का,
मिली है सोच में कुछ नई दिशाओं का असर है ये।

हुआ जब कम दरद तो लोग खुशियाँ बांटने आये,
‘झलक’ अपने ही जीवन की अदाओं का असर है ये।

🖊️लीलाबहन पटेल ‘झलक’

ध्यान रहे

(8गा)
खुद से खुद का सन्मान रहे,
खुद की ताकत का ध्यान रहे।

अरमानों की चद्दर मोटी,
लगती अपनी हस्ती छोटी,
मनमें धीरज का ज्ञान रहे,
खुद की ताकत का ध्यान रहे।

हाथ रहेगी डोर समय की,
होती है सब भोर अजय की,
जीवन में सच्ची शान रहे ,
खुद की ताकत का ध्यान रहे।

भीतर की मस्ती मस्त रखो,
दुनियादारी को हस्त रखो,
कर्मों में अपनी जान रहे,
खुद की ताकत का ध्यान रहे।

जिह्वा रखते जो म्यान नहीं,
रखते शब्दों को बान नहीं,
कुदरत इससे हेरान रहे,
खुद की ताकत का ध्यान रहे।

🖊️Leelaben Patel