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અણસારમાં

બંધારણ: ગાગાલગા×૪

થોડો સમય જાતાં ફરક દેખાય છે વ્યવહારમાં,
વ્યવહારનો ઉત્તર મળે છે શબ્દના થડકારમાં.

આખો સમંદર પાર કરવાનો રહે બાકી હજી,
તૂફાનથી હારીને અટકે કેમ રે મઝધારમાં.

એક મૂંઝવણની ઓરડીમાં રોશની છે ધૂંધળી,
પણ દ્રશ્ય આખું જોઈ લીધું માત્ર એક અણસારમાં.

જીવનની બાજીમાં ભલે આવ્યો હશે એક્કો છતાં,
જોજે જરા પલટી જશે એ આંખનાં પલકારમાં.

ખીલી ઉઠે સૌંદર્ય જાણે રૂપનાં શણગારથી,
સોનું કે ચાંદી ઝાંખું પડશે કુદરતી શણગારમાં.

🖊️Ami Maheta

हां वो है

दिल के हर कोने मे वो है, जज़्बातों के ज़िक्र में वो है
कभी यहां तो कभी वहां हर जगह मुझे दिखता वो है,

गुलाबोंके इन हसीन बागिचोमें भी महकता रोज़ वो है
कभी यहां तो कभी वहां हर जगह मुझे दिखता वो है,

अली की अझान में दिलकश इस जहान में भी वो है
कभी यहां तो कभी वहां हर जगह मुझे दिखता वो है,

शहर के गलियारों में हर किसीके आशियानों में वो है
कभी यहां तो कभी वहां हर जगह मुझे दिखता वो है,

अब्र से गिरी इन बूंदों में भी ज़िक्र आज उसका होता है
हां ये सच्चा इश्क है जो आजकल कही मिल नही पाता है ।

🖊️Piyush Maru अद्वैत✨

ध्यान रहे

(8गा)
खुद से खुद का सन्मान रहे,
खुद की ताकत का ध्यान रहे।

अरमानों की चद्दर मोटी,
लगती अपनी हस्ती छोटी,
मनमें धीरज का ज्ञान रहे,
खुद की ताकत का ध्यान रहे।

हाथ रहेगी डोर समय की,
होती है सब भोर अजय की,
जीवन में सच्ची शान रहे ,
खुद की ताकत का ध्यान रहे।

भीतर की मस्ती मस्त रखो,
दुनियादारी को हस्त रखो,
कर्मों में अपनी जान रहे,
खुद की ताकत का ध्यान रहे।

जिह्वा रखते जो म्यान नहीं,
रखते शब्दों को बान नहीं,
कुदरत इससे हेरान रहे,
खुद की ताकत का ध्यान रहे।

🖊️Leelaben Patel