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*/ ?> अछान्दस Archives - Shabdoni Sangathe

मुलाकात – Lekhanotsav

मेरे छोटे से कमरे में, मेरी मुझसे मुलाकात हुई हैं,
जिस्म सिराहने रख रूह से, थोड़ी सी कुछ बात हुई हैं।

मैं तो खामोश बैठा था, पर दिल मेरा सब बोल रहा था,
कोरे से एक पन्ने पर मानो, स्याही की बरसात हुई हैं।।

मैं सारी दुनिया देख रहा था, एक कोने में बैठा बस,
अपनों की राह तकने में, यूँ बैठे- बैठे रात हुई है।

एक तमाशा ये भी देखा, मैंने दुनिया वालों का,
ज़िंदा रहते जुदा हुए सब, मरने पर दुनिया साथ हुई हैं।।

कुछ यूँ चढ़ा हैं नशा ये सबको, भेड़ चाल चलने का,
जैसे कि काँटों वाली भी, राहें ये ख़राबात हुई हैं।

अपने हक को पाने को, लड़ना पड़ता हैं खुद से ही,
खुद से लड़ लड़ कर मेरी, खत्म सारी मुदारात हुई हैं।।

🖊️Akash Yadav

तन्हाईकी आवाज़

रातकी ख़ामोशी चिल्लाती बहोत है,
तन्हाईकी आवाज़ सुनती बहोत है,

आँखों में तन्हाईकी चिनगारी छा गई,
ये ख़ामोश शमा भी जलती बहोत है,

चार दीवारों से नाता जोड़ चुका हूँ,
अँधेरी रात दिनकी तवारिख दिखाती बहोत है,

में परवाना था उसकी दिवानकी में,
ये करहवटी रात तुंम्हे बुलाती बहोत है,

सायद वो तुम्हे पेहचानने लगी है,
इसलिये वो अकेले में मुस्कुराती बहोत है,

रातकी ख़ामोशी चिल्लाती बहोत है,
तन्हाईकी आवाज़ सुनती बहोत है,

🖊️Chintu Patel

आखरी वार

हर एक  की  शख्सीयत  में  कोई न कोई दाग है
पता  नही  क्यू सब  कहते  इसे बेसुरा सा राग है,

कई रंजीशो  से  घिरी ये एक  जलती हुई आग है
ये तो कोई  सूमसान  सी गुलाबो कि एक बाग है,

आशिक़ो की  बस्ती में  गूंजा महज़ एक साझ है
महफ़िल की  इस  जान में दफन तो कई राझ है,

लोग कहते थे  आशिकी पे  उसे बहुत ही नाझ है
आज तभी तो मुशायरोमें दबी उसकी आवाज़ है,

कोई कहता रोग है तो कोई उसे दीवाना कहता है,
ये जो है आदत उसे तुम्हारी ये तो इश्क का आखिरी वार है ।
ये जो है आदत उसे तुम्हारी ये तो इश्क का आखिरी वार है ।

🖊️Piyush Maru