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नारी

गालगागा लगालगा गागा

नारी

इस धरा पर बडा धरम नारी,
हर खुशी का यहाँ जनम नारी ।

द्रष्टि में शुद्धता अगर है तो,
पूज्य है पूज लो परम नारी ।

मिले सुख या कभी दरद पाये,
हर दरद का यहाँ मलम नारी ।

ना समज को समज ऐसी दे दे,
शब्द के अर्थ का मरम नारी ।

तन से मन से जुडी रहे घरमें ,
अपने बच्चों का जैसे दम नारी ।

जग की पालक हे वो वही चालक,
प्यार का जैसे हर कदम नारी ।

जिंदगी को ये हाथ में लेकर ,
खुद की किस्मत लिखे कलम नारी।

लीलाबहन पटेल’झलक’

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